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महर्षि कुम्भज ऋषि (प्रथम वैज्ञानिक)



कुम्भकार शब्द का आशय - 'कुम्भ' का अर्थ- कलश, घड़ा, समूह से है। 'कार' शब्द का अर्थ - निर्माण करने वाला, बनाने वाला या कारीगर से है। 'आर्य' शब्द का अर्थ- यज्ञकर्ता या वैदिक धर्म को धारण करने वाले समूह से है। इस प्रकार उक्त तीनों शब्दों को जोडऩे पर (कुम्भ+कार+आर्य)= कुम्भकार्य शब्द बना। जिसका अर्थ- कलश का निर्माण करने वाले 'यज्ञकर्ता' से है। इस प्रकार 'कुम्भकाआर्य' मूल शब्द को 'कुम्भकार्य' कहा गया। फिर 'कुम्भ कार्य' शब्द बना। फिर 'कुम्भार्य' शब्द का अपभ्रंश होकर 'कुम्हार्य' शब्द बना और अन्त में 'कुम्भार्य' शब्द का अपभ्रंश होकर 'कुम्हार' शब्द बना दिया गया। इसी कुम्हार को दुनिया का सबसे पहला एवं प्राचीनतम भारतीय शिल्पकार माना जाता है।

 

जिन्होंने अपनी वैज्ञानिक बुद्धि से मिट्टी की विभिन्न आकृतियों में मानव उपयोग एवं देव कार्यों के उपयोग की वस्तुओं बर्तनों, मूर्तियों एवं कलाकृतियों का निर्माण किया है। स्कंध पुराण में उल्लेख मिलता है कि कार्तिक माह के बैकुंड चतुर्दशी को गौतम ऋषि ने 'महर्षि कुम्भज ऋषि के रूप में अवतार धारण कर जन्म लिया है। जिन्हें (सृष्टि चक्र) चाक का जनक, विश्व के प्रथम वैज्ञानिक के रूप में आज भी याद किया जाता है।



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